(12) Rajasthan GK One Liner Questions Answers PDF by jepybhakar

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कटार गढ़ , कुंभलगढ़ दुर्ग में स्थित है। ( कटारगढ़ एक लघु दुर्ग है।)

कुंभलगढ़ दुर्ग के बादल महल (जुनी कचहरी) में महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था।

महाराणा कुंभा की हत्या कुंभलगढ़ दुर्ग में की गई थी। ( कुंभलगढ़ दुर्ग में स्थित मामादेव के कुंड के पास महाराणा कुंभा की उनके पुत्र ऊदा हत्या की थी।)




सम्राट अकबर के दरबारी लेखक अबुल फजल ने राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग के बारे में कहा था कि 'यह दुर्ग इतनी बुलंदी पर बना हुआ है कि नीचे से ऊपर देखने पर सिर की पगड़ी गिर जाती है'।

कुंभलगढ़ दुर्ग की दीवार की लंबाई 36 किलोमीटर है।

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रणथंभोर दुर्ग , का प्रवेश द्वार ‘नौलखा दरवाजे’ के नाम से जाना जाता है।

हम्मीर देव चौहान, रणथंभौर दुर्ग का सबसे प्रतापी शासक था।

राजस्थान का पहला साका, रणथंबोर दुर्ग से संबंधित है।

अब्दुल फजल ने रणथंभोर दुर्ग के संबंध में कहा था कि 'अन्य सब दुर्ग नंगे हैं जबकि यह अतुल बख्तरबंद है'।

"सिंघगमन, सत्पुरुष वचन, कदली फलै इक बार।
तिरिया, तेल, हम्मीर हठ, चढे न दूजी बार।।"
यह दोहा राजस्थान के प्रसिद्ध रणथंबोर दुर्ग के शासक के संबंधित है।

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'यह ऐसा किला है जिसका दरवाजा कोई आक्रमणकारी नहीं खोल सका' हसन निजामी का यह कथन राजस्थान के जालोर के किले के बारे में था।

सोजत दुर्ग का निर्माण निंबा ने 1460 ईसवी में करवाया था।

'मयूरध्वज गढ़' जोधपुर के दुर्ग मेहरानगढ़ का अन्य नाम है

महरानगढ़ दुर्ग का निर्माण 'राव जोधा जी' ने करवाया था।

लाल पत्थरों से निर्मित मेहरानगढ़ दुर्ग चिड़ियाटूँक पहाड़ी पर स्थित है।

'सिवाणा दुर्ग' के साथ राठौर वीर कल्ला रायमलोत की वीर गाथाएं जुड़ी हुई है।

'पदरा सो पंदरोतरे, जेठ मास जोधाण।
सुदि इग्यारस वार सनि, मंडियो गढ़ जोधाणा।।'
यह दोहा मेहरानगढ़ दुर्ग से संबंधित है।

सिवाना दुर्ग बाड़मेर जिले में है।

कौटिल्य ने दुर्गों के चार प्रकार बताए हैं।
( यह हैं औदक दुर्ग (जल दुर्ग), पर्वत (गिरी दुर्ग) ,धान्वन दुर्ग,वन दुर्ग।)

रियासत काल में राज्य की सुरक्षा हेतु औदक दुर्ग बनाए जाते थे यह जल से घिरे हुए होते थे।

महाराणा प्रताप ने चित्तौड़ के किले से मेवाड़ का शासन प्रारंभ किया था।

धनु दूर ,महि दुर्ग जलदुर्ग, वृक्ष दुर्ग, न्र दुर्ग ओर गिरीदुर्ग। यह दुर्गों के छह नाम 'मनुस्मृति' द्वारा बताए गए हैं ।

चित्तौड़गढ़ दुर्ग गंभीरी और बेड़च नदियों के संगम स्थल के समीप अरावली पर्वतमाला की 1850 फीट ऊंचे पर्वत शिखर पर बना हुआ है ।

चित्तौड़गढ़ दुर्ग का निर्माण चित्रांगद मौर्य ने करवाया था।

जो पर्वत पर स्थित हो ,उसे गिरी दुर्ग कहा जाता है।

सिंहल द्वीप के राजा गंधर्वसेन की पुत्री रानी पद्मिनी ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग में सन 1303 ईस्वी में जोहर किया था।(यह युद्ध अलाउद्दीन खिलजी हुआ राणा रतन सिंह के मध्य हुआ था)

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दिल्ली सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी द्वारा 1303 ईसवी में जीत के बाद चित्तौड़गढ़ दुर्ग का नाम 'खिज्राबाद दुर्ग' रखा था।(अलाउद्दीन खिलजी ने अपने पुत्र खिज्र खां को दुर्ग सौंपकर खिज्राबाद रख दिया)

अलाउद्दीन खिलजी ने कुंभलगढ़ दुर्ग पर आक्रमण कभी नहीं किया।

विजय स्तंभ को, 'पौराणिक हिंदू मूर्ति कला का अनुपम खजाना' या 'भारतीय मूर्तिकला का विश्वकोश' कहा जाता है।

हड़प्पा सभ्यता के सबसे बड़े नगर की अवशेष , धोलावीरा स्थान के उत्खनन से प्राप्त हुए हैं।

राजस्थान में महाभारत काल के अवशेष 'अलवर के निकट बैराठ' व 'भरतपुर के निकट नोह' में मिले हैं।

चावल खाद्य पदार्थ से , आहड़ सभ्यता के लोग अच्छी प्रकार से परिचित थे।

बैराठ में 'मौर्य कालीन सभ्यता' के अवशेष प्राप्त हुए हैं।

हड़प्पा संस्कृति के एक प्रमुख स्थल 'कालीबंगा' की खोज का श्रेय ए. घोष को जाता है। (कालीबंगा हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे फैली हुई थी। यहां विश्व के प्राचीनतम कृषि के प्रमाण मिले हैं ।
 ए घोष ने इसकी 1951- 1952 में खोज की थी।)

आहड़ संस्कृति के लोग चांदी धातु से परिचित नहीं थे।

पालतू पशु घोड़े से , सिंधु घाटी के लोग परिचित नहीं थे।

कालीबंगा, पीलीबंगा व रंग महल के अवशेषों से यह पता चलता है कि विश्वविख्यात 'सैन्धव सभ्यता' का राजस्थान में विकास हुआ था।

राजसमंद में स्थित पुरातात्विक स्थल गिलूण्ड , बनास नदी के समीप स्थित है।

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बालाथल पुरातात्विक स्थल की खोज का श्रेय डॉक्टर वी. एन. मिश्र पुरातत्वविद् को है।

उदयपुर जिले में स्थित बालाथल पुरातात्विक स्थल के उत्खनन में 11 कमरों युक्त एक विशाल भवन की प्राप्ति हुई है।

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