(Part-1) Science and Technology Notes for RPSC (ras maines 2018), UPSC in hindi by Jepybhakar

science and technology for ras, science and technology for ras in hindi, science and technology for ras pdf, science and technology for ras 2018 pdf, science and technology notes for RPSC (ras 2018, UPSC in hindi by jepybhakar, science and technology for upsc, science and technology for upsc pdf, science and technology for upsc 2018, science and technology for upsc books, rajasthan gk important notes




समन्वित निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (Integrated Guided Missile Development Programme-IGMDP) :-
इसकी शुरुआत भारत में 1983 ईस्वी में की गई।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत किए जाने वाले अनुसंधान एवं विकास की जिम्मेदारी डीआरडीओ (DRDO) को सौंपी गई।
इस कार्यक्रम के अंतर निर्देशित प्रक्षेपास्त्र, अर्द्ध स्वचालित प्रक्षेपास्त्र, गति के आधार पर निर्देशित प्रक्षेपास्त्र व ऊर्ध्वाधर शक्ति के आधार पर कार्य वाले प्रक्षेपास्त्र का निर्माण किया जाता है।
मिसाइल प्रौद्योगिकी में भारत को आत्मनिर्भर बनाते हुए डी. आर. डी. ओ. ने वर्ष 2008 में इस कार्यक्रम में समाप्ति की घोषणा की।
जून 2016 में भारत “मिसाइल प्रौद्योगिकी नियत्रण व्यवस्था (Missile Technology Control Regime-MTCR) का सदस्य (35वाँ) बना।

इसके अंतर्गत विकसित मिसाइल प्रणाली निम्नलिखित है -
पृथ्वी, अग्नि, त्रिशूल, नाग और आकाश

बैलिस्टिक मिसाइल (Ballistic Missile) :-
बैलिस्टिक मिसाइल ऐसी तकनीक पर आधारित होती है, जिसमें राॅकेट इंजन मिसाइल को आरंभिक चरण में प्रणोदित करता है। उसके बाद मिसाइल का प्रक्षेपण मार्ग गुरूतवाकर्षण के द्वारा निर्धारित होता है।
एक बार ईधन जलने के पश्चात इसका मार्ग बदलना संभव नही होता है।
बैलिस्टिक मिसाइल में लगे राॅकेट इंजन ईधन का स्वयं वहन करता है जिसे कारण इसे वायुमण्डल से आॅक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है। इस वजह से इसे वायुमण्डल से बाहर भी प्रक्षेपित की जा सकती है।
इस प्रकार की मिसाइल का प्रक्षेपण मार्ग परवलय आकार का होता है।
अधिकतम दुरी तय करने के 45 डिग्री के कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है। इसके द्वारा तय दुरी इसकी गति एवं प्रक्षेपण कोण पर निर्भर करती है।

क्रुज मिसाइल (Crulse Misslle) :-
क्रुज मिसाइल पायलटरहित, स्वचालित तथा निर्देशित यान है जो काफी समय तक पृथ्वी के समानांतर बेहद कम ऊँचाई पर उड़ सकता है।
इनमे जेट इंजन का प्रयोग किया जाता है जो वायुमण्डलीय आॅक्सीजन का प्रयोग करता है। इसी कारण से ये वायुमंडल में ही उड़ती है।
ये कम ऊँचाई पर उड़ने पर शत्रु के राडार के पकड़ में नहीं आती है।
इसको प्रक्षेपण के बाद भी इसकी दिशा में बदलाव किया जा सकता है।
इसको गति के आधार पर सबसोनिक, सुपरसोनिक व हाइपरसोनिक तीन वर्गो में बाँटा जा सकता है।
इनका प्रक्षेपण वायु, जमीन, जहाज व पनडुब्बी की सतह से किया जा सकता है।

Download This File Click on this Button






Contact Form

Name

Email *

Message *

Designed By Dharmendar Gour