Biology Important One Liner Question In Hindi (Part-7) by Jepybhakar

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121. शरीर में घावों का भरना किस प्रकार के कोशिका विभाजन का परिणाम होता है - सूत्री विभाजन

122. जाईगोट किस प्रकार का कोशिका विभाजन होता है - सूत्री विभाजन

123. असूत्री विभाजन की खोज किसने की थी - फार्मर तथा मुरे ने


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124. विनिमय (cross over) में किस अवस्था में होता है - पैचिटिन

125. गुणसूत्रों की संख्या घटकर आधी किस अवस्था में रह जाती है - प्रथम एनाफेज



126. कोशिका सिद्धांत स्लाइडेन और स्वान ने दिया।

127. जनन द्रव्य प्रभाव सिद्धांत ऑगस्ट विजमान दिया।

128. एक जीन, एक एंजाइम, एक उपापचयी अभिक्रिया सिद्धांत जॉर्ज बिडल और एडवर्ट टैटम ने दिया।


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129-136. विषाणु (Virus) - अति सूक्ष्म, अविक्लप परजीवी, अकोशिकिय (Non-cellular) तथा विशिष्ट न्यूकिल्यो प्रोटीन कण हैं, जो किसी भी जीवित परपोषी के अंदर रहकर प्रजनन करते हैं।
यह सजीव एवं निर्जीव के मध्य की कड़ी है।
इनमें जीव द्रव्य व कोशिकांगो का अभाव होता है।
अनेक जैविक क्रियाओं (श्वसन, उत्सर्जन) का अभाव होता हैं
इनके क्रिस्टल बनाए जा सकते है।
गुणन केवल पोषी कोशिका में होता है।
वायरस रचना में प्रोटीन के आवरण से घिरा न्यूक्लिक अम्ल होता हैं।
वायरस में न्यूक्लिक अम्ल RNA अथवा DNA दो में से एक होता हैं।


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137-139. वायरस तीन प्रकार के होते हैं-
i. पादप विषाणु - इसमें न्यूक्लिक अम्ल RNA होता है।
जैसे - पीला मोजैक विषाणु (YMV), TMV
ii. जंतु विषाणु - इसमें DNA या कभी-कभी RNA भी पाया जाता है।
जैसे - मंपस, इंफ्लुएंजा वायरस
iii. जीवाणु भोजी या बैक्टीरियाफेज - यह केवल जीवाणुओं पर आश्रित रहते हैं। इनमें DNA पाया जाता है।
जैसे - T2 Phage


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140. पौधों में विषाणु जनित रोग :-
पपीता, केला, सरसों - मोजैक
गन्ना -grass shoot disease (त्रण समान प्ररोह)
तिल - फिल्लोड़ी।
बादाम -रेखा पेटर्न
भिंडी - पीली नाड़ी मोजैक


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141. पशुओं में होने वाले वायरस जनित रोग :-
चौपाया (कुत्ता) - रेबीज (वायरस-स्ट्रीट)
गाय - हर्पोज (वायरस- हार्पोज), चेचक (वायरस -(वैरियोला वैक्सीनिया), ब्लू टंग (वायरस-ब्लू टंग)
भैंस - चेचक (वायरस - पाक्स विरिडोआर्थोपाक्स)


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142-144. विषाणु का उपयोग -
i. सायनोफेज - अनेक स्थानों पर अवांछित नील हरित शैवाल ओं को साफ करने में क्यों किया जाता है। (सायनोफाज वायरस वे होते हैं जो साइनोबैक्टीरिया अर्थात नील हरित शैवाल में रोग उत्पन्न करते हैं)
ii. बैक्टीरियोफेज - हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने के लिए इनका योग किया जाता है। इनके द्वारा जल को सड़ने से बचा जाता है। गंगा के पानी में जीवाणु भोजी की उपस्थिति से यह क्रिया स्वत: होती रहती है।
बैक्टीरिया फेज के माध्यम से जीवाणुओं के विभिन्न विभेदो को पहचाना जा सकता है।
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