Biology Important One Liner Question In Hindi (Part-10) by Jepybhakar

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169-171. गाल्जीकाय (Gelgibodies) :- इसकी खोज कैमिलो गोल्जी ने 1898 में की। इसे लाईकोकोंड्रीया भी कहा जाता हैं।
पौधों में इसे डिक्तियोसोम कहा जाता हैं।
ये नीले-हरे शैवालों, जीवाणु एवं माइक्रो प्लाज्मा को छोड़कर अन्य सभी जीव धारियों की कोशिकाओं में मिलते हैं।
यह स्त्रवी कोशिकाओं में अधिक पाए जाते हैं। विभिन्न पदार्थों (मुख्यता एंजाइम) का स्त्रावण करना गाल्जीकाय का महत्वपूर्ण कार्य हैं। कोशिका विभाजन के समय कोशिका पट्टिका (cell plate) के निर्माण में सहायक होते हैं।

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172-180. अंत: प्रदव्यी जालिका - इसकी खोज के आर पोर्टर ने सन 1945 में की।
* यह स्तनधारीयों की लाल रुधिर कणिकाओं की कोशिकाओं को छोड़कर सामान्यतया सभी सुकेंद्रकीय कोशिकाओं में पाई जाती है।
* जीवाणु एवं नीले-हरे शैवालों में इनका अभाव होता है।
* यह लाइपोप्रोटीन की दोहरी इकाई झिल्ली से बनी होती है।
* इसका कार्य कोशिका द्रव्य तथा केंद्रक द्रव्य के बीच संबंध स्थापित करना है।

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* राइबोसोम की उपस्थिति के आधार पर अंत: प्रदव्यी जालिका दो प्रकार की होती है।
i. सपाट अंत: प्रदव्यी जालिका - बाहरी कला सपाट या चिकनी। इस पर राइबोसोम नहीं पाए जाते हैं जिसके कारण यह प्रोटीन संश्लेषण में भाग नहीं लेती है।
ii. कणिका मय अंत: प्रदव्यी जालिका - इसकी बाहरी सतह खुरदरी होती है। इसकी सतह पर राइबोसोंस पाए जाते हैं जिसके कारण यह प्रोटीन संश्लेषण में भाग लेती है।
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181-188. अंत: प्रदव्यी जालिका के कार्य -
* जीव द्रव्य तंतुओंं के द्वारा एक कोशिका को दूसरी कोशिका से संबंधित रखने में मदद करती है।
* यह कोशिका में कंकाल की भांति कार्य करती है तथा उसे यांत्रिक शक्ति प्रदान करती है।
* कोशिका विभाजन के तल को निश्चित करती है।
* पदार्थों के अंदर बाहर आने जाने पर नियंत्रण रखती है।
* अनुवांशिक पदार्थों के अभिगमन में सहायक होती है।
* सपाट अंत: प्रदव्यी जालिका ग्लाइकोजन संग्रह में सहायता करती है।
* कोशिका भित्ति एवं कोशिका विभाजन के बाद केंद्रक आवरण के निर्माण का कार्य करती है।
* कणिका मय अंत: प्रदव्यी जालिका पर राइबोसोमस की उपस्थिति के कारण प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करती है।

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