Biology Important One Liner Question In Hindi (Part-11) by Jepybhakar

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189-196. राइबोसोंस :-
* खोज पैलाडे ने सन् 1955 में की।
* डमरू की आकृति या लगभग गोलाकार आकृति वाले सघन सूक्ष्म कण होते हैं।
* राइबोन्यूक्लिक अम्ल (RNA) एवं प्रोटीन के बने होते हैं।
* RNA एवं प्रोटीन की उपस्थिति कारण इन्हें राइबोन्यूक्लियोप्रोटीन कण भी कहा जाता है।
* राइबोसोमस अंत: प्रदव्यी जालिका से जुड़े रहते हैं। यह माईट्रोकोंडिया, हरित लवक एवं केंद्रक में भी पाए जाते हैं।


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* यह दो प्रकार के होते हैं।
i. 70S राइबोसोंस - आकार में छोटे व अवसादन गुणांक 70S होता हैं। यह माईट्रोकोंडिया, क्लोरोप्लास्ट एवं बैक्टीरिया आदि में पाए जाते हैं। 70S राइबोसोम की बड़ी सबयूनिट 50s तथा छोटी सबयूनिट 30s होती है।
ii. 80S राइबोसोम - आकार में बड़े व अवसादन गुणांक 80S होता हैं। यह उच्च विकसित पौधों एवं जंतु कोशिकाओं में पाए जाते हैं। 80S राइबोसोम की बड़ी सबयूनिट 60s तथा छोटी सबयूनिट 40s होती है।
* राइबोसोम का मुख्य कार्य में अमीनो अम्ल के द्वारा प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करना है।


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197-203. तारककाय (Centrosome) :-
* यह गोलाकार रचना होती है जो केंद्रक की बाहरी स्तर पर लगभग मध्य में स्थित रहती है।
* यह मुख्य रूप से जंतु कोशिका में होती है।
* कुछ पद कोशिकाएं जैसे शैवाल तथा कवक में पाया जाता है।
* यह दो स्पिंडिल के आकार के कणों का बना होता है जिन्हें सेंट्रियोल कहते हैं।
* सेंट्रियोल के चारों ओर एक स्वच्छ कोशा द्रव्य भी का घेरा होता है जिन्हें सैंटरोस्फीयर कहते हैं।
* सेंट्रियोल का महत्व कोशा विभाजन के समय स्पिंडल के निर्माण में मदद करना है।
*कोशिका विभाजन के समय सेंट्रियोल दो भागों में बंटकर दो विपरीत ध्रुव में चले जाते हैं।

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204-210. लाइसोसोम (Lysosomes) :-
* इसकी खोज डी डूवे ने की। इसके लिए डी डुवे को सन् 1974 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
* यह अधिकतर जंतु कोशिकाओं में मुख्य रूप से एंजाइम अभिक्रिया करने वाली कोशिकाओं में पाया जाता है। जैसे - अग्नाशय, यकृत, मस्तिष्क, थायराइड इत्यादि।
* लाइसोसोम एक पतली परत वाली गोलाकार या अनियमित आकार की थैलियां होती है।
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* इनका निर्माण गोल्जीकाय अथवा अंत:प्रदव्यी जालिका से होता है।
*लाइसोसोम के एंजाइम जब किसी कारण से बाहर निकलते हैं तो यह सक्रिय होकर कोशिका की विभिन्न पदार्थों को विघटन कर देते हैं और कोशिका भी विखंडित हो जाती है इसी कारण से लाइसोसोम को आत्मघाती थैली भी कहा जाता है।
*लाइसोसोम का मुख्य कार्य कोशिका में विभिन्न पदार्थों का पाचन करना है।
*भोजन की कमी के समय लाइसोसोम कोशिका द्रव्य में स्थित प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड आदि का पाचन करते हैं।
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