Biology Important One Liner Question In Hindi (Part-13) by Jepybhakar

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केंद्रक :-
इसकी खोज रॉबर्ट ब्राउन ने सन 1831 में की।
केंद्र के 4 भाग होते हैं
i. केद्रक-कला
ii. केंद्रक-द्रव्य
iii. केंद्रिका
iv. क्रोमेटिन धागे


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केंद्रिका की खोज सर्वप्रथम फोंटाना ने सन् 1781की थी। नामकरण सन 1840 में वूमेन के द्वारा न्यूक्लिओलस नाम दिया गया।
* केंद्रिका प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में नहीं पाई जाती है तथा कोशिका विभाजन के समय गायब हो जाती है।
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गुणसूत्र (Chromosome) -
स्ट्रॉसबर्गर ने 1875 में खोज की तथा 1875 में वाल्डेयर के द्वारा क्रोमोसोम की संज्ञा प्रदान की गई।
गुणसूत्र मैट्रिक्स तथा डीएनए का बना होता है।
मैट्रिक्स एक तरल पदार्थ है जिसमें धागे के समान क्रोमेटिन होता है जो डीएनए तथा हिस्टोन प्रोटीन का बना होता है।
कोशिका विभाजन के समय गुणसूत्र के क्रोमेटिं इनका द्विगुणन होता है जिससे दो पुत्री क्रिमेटिं का निर्माण होता है जिन्हें क्रोमोनिमैटा कहते हैं


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कार्बोहाइड्रेट :-
i. मोनोसैकेराइड्स - राईबोस, डीऑक्सिराइबोस, जाइलोस (5 कार्बन परमाणु), ग्लूकोस फ्रुक्टोज, गैलेक्टोज एवं मैनोस (6 कार्बन परमाणु)।
ii. डाईसैकेराइड्स - सुक्रोज, माल्टोज, लैक्टोज़।
iii. ट्राईसैकेराइड्स - रैफिनोस
iv. पॉलीसैकेराइड्स - इंसुलिन, सेलुलोस, लिग्निन, ग्लाईकोजन, पेक्टिन आदि।


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* ग्लूकोस कार्बन संश्लेषण की प्रथम उपज होती है।
* फ्रुक्टोज फलों में मिलता है। जो सबसे मीठी शर्करा है।
*सुक्रोज गन्ना में तथा चुकंदर में मिलता है।
* लेक्टोज दूध में तथा माल्टोज अंकुरित बीजों में पाया जाता है।


डीऑक्सीरिबोन्यूक्लिक अम्ल (Deoxyribonucleic Acid, DNA) :-
जेडी वॉटसन तथा एफ एच सी क्रिक ने सन 1953 में डीएनए की रचना के बारे में एक मॉडल प्रस्तुत किया जिसे वॉटसन और क्रिक मॉडल के नाम से जानते हैं।

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* इस मॉडल के अनुसार डीएनए की रचना 2 पॉलिन्यूक्लियोटाइड चेनों द्वारा होती है। यह विदिशा में घूमकर द्वीचक्राकार रचना (Double helical structure) बनाती है वह आपस में हाइड्रोजन बंदों से जुड़ी हो जाती है।
* DNA के एक्सरे विश्लेषण का अध्ययन एम एच एफ विलकिंस तथा उनके साथियों ने किया। इसके लिए वाटसन, क्रिक और विलकिंस को सम्मिलित रूप से 1962 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
*डीएनए रचना में दोनों चैने एक दूसरे से हाइड्रोजन बंध द्वारा जुड़ी रहती है। जिसके एडमिन एवं थायमीन के बीच दो हाइड्रोजन बंध तथा ग्वानीन तथा साइटोसीन के मध्य तीन हाइड्रोजन बंध होते हैं।
* वामावर्त डीएनए के कुंडल अन के टेढ़े मेढ़े होने के कारण इसे Z-D.N.A. कहां जाता है।
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राइबो न्यूक्लिक अम्ल (Ribonucleic acid, RNA) :-
इसकी सरचना डीएनए जैसी ही होती है। इसमें थाइमिन के स्थान पर यूरेसिल नामक बेस लगा रहता है।
यह कोशिका के अंदर केंद्र तथा साइटोप्लाज्म दोनों में पाया जाता है।
आर एन ए का प्रमुख कार्य प्रोटीन संश्लेषण में सहायता प्रदान करना है।
कुछ पादप वायरसों में यह अनुवांशिक पदार्थ के वाहक का कार्य करता है जैसे - TMV, जीवाणु भोजी आदि।
R.N.A. मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं।
i. राइबोसोमल आरएनए (riobosomal-RNA or r-RNA)
ii. स्थानांतरण आर एन ए (transfer-RNA or t-RNA)
iii. संदेश वाहक आर एन ए (messenger-RNA or m-RNA)
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* r-RNA :- कोशिका में उपस्थित कुल आरएनए का लगभग 75% भाग इसका है। यह राइबोसोम पर लगे रहते हैं और प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करते हैं। इनका संश्लेषण न्यूक्लिओल में होता है। यह अत्यंत स्थित प्रकृति का होता है।

* t-RNA :- कोशिका में उपस्थित कुल आरएनए का 15 से 25% भाग इसका होता है। सभी प्रकार के आरएनए में ये सबसे छोटा होता है। प्रोटीन संश्लेषण में विभिन्न प्रकार के अमीनो अम्लों को राइबोसोम पर लाते हैं जहां पर प्रोटीन बनता है।
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* m-RNA :- जैकब तथा मोनाड के द्वारा 1961 में इसका नामकरण किया गया। कुल आर एन ए का 5 से 10% भाग होता है। यह डीएनए से बनते हैं। यह अमीनो अम्ल को चुनने में मदद करते हैं। इनका जीवन काल बहुत कम रहता है।

* डी एन ए, आर एन ए तथा हिस्टोन मिलकर क्रोमोसोम बनाते हैं।
* हिस्टोन प्रोटीन :- यह पांच प्रकार के होते हैं। जिनमें से H2A, H2B, H3, H4 को कोर हिस्टोन प्रोटीन कहते हैं। H1 को क्रीप हिस्टोन प्रोटीन कहते हैं।

* द्विगुणन अथवा Duplication :- डीएनए से डीएनए बनने की विधि को द्विगुणन अथवा डुप्लीकेशन कहा जाता है।
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* अनुलेखन अथवा Transcription :- डीएनए से आरएनए बनने की विधि को ट्रांसक्रिप्शन कहा जाता है। इसकी खोज सर्वप्रथम टयूमर वायरस (Rous Scroma Virus) में की गई जिसमें RNA से DNA का निर्माण होता है।

* रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन :- आरएनए से डीएनए बनने की विधि को रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन य उल्टा अनुलेखन का जाता है।

* अनुवादन अथवा Translation :- m-RNA से प्रोटीन बन्नी की विधि को अनुवादन अथवा ट्रांसलेशन कहा जाता है।
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* जीन :- जोहनसन ने जीन शब्द का प्रयोग किया। डीएनए का वह छोटा से छोटा खंड जिसमें आनुवंशिक कोड निहित रहता है, जीन कहलाता है। जिन्हें लक्षणों के निर्धारक, नियंत्रक एवं वाहक होते हैं।

* यूग्लीना को छोड़कर किसी भी जंतुओं में पर्णहरीम नहीं पाया जाता है।
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