Biology Important One Liner Question In Hindi (Part-14) by Jepybhakar

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कोशिका विभाजन :-
मातृ कोशिका से पुत्री कोशिकाओं निर्माण की क्रिया को कोशिका विभाजन कहते हैं।
हावर्ड और पेल्फ ने कोशिका चक्र को चार चरणों में बांटा -
i. G1-अवस्था :- आरएनए तथा आवश्यक प्रोटीन का संश्लेषण।
ii. S-अवस्था :- डीएनए संश्लेषण की अवस्था
iii. G2-अवस्था :- विभाजन की तैयारी
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iv. M-अवस्था :- इस अवस्था में कोशिका का विभाजन होता है।
इसे पुनः पांच चरणों में विभक्त किया गया है।
a. प्रोफेज
b. मेटाफेज
c. टीलोफेज
d. साइटोकाईनेसिस


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* अंतरावस्था - इसमें G1, S तथा G2 अवस्था को सम्मिलित रूप से इंटरफेज कहते हैं जो दो विभाजन के मध्य कि अवस्था है। व्हाट इस अवस्था में कोशिका उपापचयी क्रिया द्वारा विभाजन की तैयारी करती है।

* माइक्रोटिक प्रावस्था :- इसमें केंद्रक एवम् कोशिका द्रव्य का बंटवारा होता है। केंद्र का विभाजन कैरियोकाइनेसिस तथा कोशिका विभाजन साइटोकाइनेसिस कहलाता है। इसको M-फेज के द्वारा भी जानते हैं।

* कोशिका विभाजन से पहले डीएनए का द्वीगुणन और फिर केंद्र तथा कोशिका द्रव्य का विभाजन होता है।
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* कोशिका विभाजन प्रमुख रूप से तीन तरह का होता है-
i. असूत्री विभाजन
ii. सूत्री विभाजन
iii. अर्धसूत्री विभाजन


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असूत्री विभाजन (Amitotic Devision or Amitosis) :-
इसमें सबसे पहले मातृ-कोशिका का केंद्रक सीधे दो भागों में बंट जाता है।
इसके ठीक बाद कोशिका द्रव्य में संकुचन होने लगता है और कोशिका द्रव्य भी बंट जाता है।
इस प्रकार के कोशिका विभाजन में किसी प्रकार की केंद्रीय घटनाएं नहीं पाई जाती है यह अविकसित कोशिकाओं में होता है।
जैसे - जीवाणु, नीलहरित, शैवाल, यीस्ट, अमीबा तथा प्रोटोजोआ।


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सूत्री विभाजन (Mitosis) :-
कोशिका विभाजन किस प्रक्रिया की खोज वाल्टर फ्लेमिंग ने 1882 में की थी।
यह विभाजन कायिक कोशिकाओं में होता है।
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इस विभाजन के दो मुख्य भाग होते हैं-
i. केंद्रक का विभाजन (Karyokinesis) -यह भी दो भागों में होता है।
a. अंतरावस्था (Interphage) - इस अवस्था में संपूर्ण विभाजन चक्र का लगभग 90 से 95% समय लगता है।
b. विभाजन प्रावस्था (Mitotic phase) - इस पर प्रावस्था में केंद्रक में श्रृंखलाबद्ध अनेक परिवर्तन होते हैं इसको पुनः चार भागों में बांटा गया है।
१. प्रोफेज - केंद्रक कला एवं केंद्रीय का लुप्त होना, स्पिंडल फाइबर का निर्माण तथा क्रोमेटिड्स का दृष्टिगोचर होना इसका प्रमुख लक्षण है।
२. मेटाफेज - क्रोमेटिड्स का मेटाफेज प्लेट पर सेंट्रोमियर से जुड़ना।
३. एनाफेज - क्रोमेटिड्स का विभाजन।
४. टिलोफेज - केंद्रकला एवं केंद्रीय का प्रकटीकरण और दो केंद्र का निर्माण।
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ii. कोशिका द्रव्य का विभाजन :- लोपेज के समय ही कोशिका के मध्य में कोशिका प्लेट का निर्माण हो कर कोशिका द्रव्य विभाजित हो जाता है फलत: दो संतति कोशिका का निर्माण हो जाता है।

इस प्रकार के विभाजन से अनुवांशिक स्थायित्व बना रहता है।
जाईगोट में इसी प्रकार का विभाजन होता है जिससे बहुकोशिकीय रचना का निर्माण होता है।
शरीर में घावों का भरना सूत्री विभाजन के फलस्वरूप ही होता है।

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अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) :-
अर्धसूत्री विभाजन सदैव द्वीगुणित कोशिका में ही होता है।
1925 में मिओसिस की खोज फार्मर एवं मोरे ने की थी।
इसमें केंद्रक व कोशिका द्रव्य के दो बार विभाजन सम्मिलित है। इन दो के विभाजनों में से पहला विभाजन मिसोसिस प्रथम कहलाता है जिसमें गुणसूत्रों की संख्या द्वीगुणित से अगुणित हो जाती है। दूसरा विभाजन मिओसिस द्वितीय साधारण समसूत्री विभाजन की भांति ही होता है। जिसमें गुणसूत्रों के अर्द्धगुणसूत्रों का बंटवारा होता है। इस कारण से से सम विभाजन भी कहते हैं।
मिओसिस के अंत में अगुणित कोशिकाएं बनती है।
यह विभाजन केवल लिंगी जनन करने वाले जीवों में होता है।

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