Biology Important One Liner Question In Hindi (Part-8) by Jepybhakar

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145. वाइरॉयड - यह मात्र छोटे RNA के खंड होते हैं तथा इन पर प्रोटीन का आवरण भी नहीं होता है। लेकिन इनमें संक्रमित करके रोग उत्पन्न करने की क्षमता होती है। यह पादप रोग के संकरण हेतु सबसे छोटे कारक होते हैं।


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146. प्रिआन - इनमें केवल प्रोटीन होता है तथा न्यूक्लिक अम्ल का अभाव पाया जाता है। इनकी खोज स्टैंले प्रुसिनर ने की, जिसके लिए इन्हें 1997 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। इन प्रोटीन कार्गो में गुणन की व संक्रमित करने की क्षमता होती है। भेड़ों में स्प्रेपी रोग इन्हीं के कारण से होता है। इस रोग से भेड़ विचलित होकर किसी आधार से अपने शरीर को रगड़ती रहती है।


147. मनुष्य के शरीर में सबसे बड़ी कोशिका तंत्रिका कोशिका है।
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148. शुतुरमुर्ग का अंडा सबसे भारी एवं बड़ी कोशिका है।

149. जीवों में दो प्रकार कोशिकाएं पाई जाती है -
i. प्रोकैरियोटिक कोशिका
ii. यूकेरियोटिक कोशिकाएं


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150. प्रोकैरियोटिक कोशिका - वे कोशिकाएं जिनमें केंद्रक कला, केंद्रक तथा सुविकसित कोशिकांग का अभाव होता है।
इनमें 70 S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं।
इनमें केंद्र पदार्थ स्वतंत्र रूप से कोशिका द्रव्य में बिखरे रहते हैं।
इनके गुण सूत्रों में हिस्टोन प्रोटीन का अभाव होता है।
उदाहरण -जीवाणु, विषाणु, नीले हरे शैवाल, बैक्टीरियोफेज आदि।
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151. यूकेरियोटिक कोशिकाएं - यूकेरियोटिक कोशिकाएं कोशिकाएं कहलाती है जिनमें केंद्र कला, केंद्रक तथा पूर्ण विकसित कोशिकांग पाए जाते हैं।
उदाहरण - जंतु, पादप व शैवाल (नीले हरे शैवाल के अलावा)

152. प्राथमिक कोशिका भित्ति केवल सैलूलोज की बनी होती है। बहुत से कवको तथा यीस्ट में यह काइटिन की बनी होती है। यह पतली, कोमल, लोचदार तथा पारगम्य में होती है।


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153. द्वितीयक कोशिका भित्ति प्राथमिक कोशिका भित्ति के नीचे होती है यह कठोर परिपक्व होती है। यह सैलूलोज, पेक्टिन एवं लिग्निन आदि पदार्थों में बनी होती है।

154. कोशिका भित्ति अनावृतबीजी पौधों की दारू वाहिनीकाओ (Xylem tracheids) में पाई जाती है, जो जाइलन नामक पदार्थ की बनी होती है।

155. प्लाज्मा झिल्ली - कोशिका द्रव्य कि वह बाहरी सीमा जो विभिन्न प्रकार के अंगों तथा आयनों के अंदर आने जाने पर नियंत्रण रखती है तथा कोशिका द्रव्य में आयनों की सांद्रता के अंतर को बनाए रखने में मदद करती है।


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156. जीवद्रव्य जीवन का भौतिक आधार का जाता है क्योंकि जीवो में होने वाली समस्त जैविक क्रिया जीवद्रव्य में संपन्न होती है।

157. जीव द्रव्य में 60% - 80% जल होता है जिसके अंदर कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ खुले रहते हैं।
जीव द्रव्य में ब्राउनी गति होती रहती है।
जीव द्रव्य में लगभग 30 तत्व पाए जाते हैं। इनमें ऑक्सीजन (62%), कार्बन (20%), हाइड्रोजन (10%), तथा नाइट्रोजन (8%) मुख्य है। शेष सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, लोहा तथा सल्फेट इत्यादि पदार्थ सूक्ष्म मात्रा में पाए जाते हैं।


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158. पुष्पों एवं फलों आदि की रिक्तिकाओं में एंथोसाइएनिन पाया जाता है जो विभिन्न रंग जैसे नीला, बैंगनी, लाल, गुलाबी आदि प्रदान करता है।

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