भारत का मध्यकालीन इतिहास (गुलाम वंश) नोट्स PDF Download -4

भारत का मध्यकालीन इतिहास (गुलाम वंश – गियासुद्दीन बलबन) नोट्स in hindi pdf download Part -4 for UPSC, RPSC RAS, SSC etc Exams By Jepybhakar

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गुलाम वंश – गियासुद्दीन बलबन, कैकुबाद और शम्सुद्दीन क्यूमर्स  Notes PDF Download :-

गियासुद्दीन बलबन (1265-1287 ई.) –

बलबन रजिया सुल्तान के समय अमीर-ए-शिकार एवं बहरामशाह के समय अमीर-ए-आखुर (अश्वशाला का प्रधान) के पद था।

गियासुद्दीन बलबन, भारत का मध्यकालीन इतिहास (गुलाम वंश) नोट्स
गियासुद्दीन बलबन

इल्तुतमिश के भांति ये भी इल्बरी तुर्क था। इसने 20 वर्ष तक वजीर की भांति तथा 20 वर्ष सुल्तान की भांति कार्य किया।
इसके दो राजत्व सिद्धांत – पहला सुल्तान का पद ईश्वर के द्वारा दिया होता है और दुसरा, सुल्तान का निरकुंश होना आवश्यक है।
बलबन के द्वारा ‘रक्त व लौह की नीति’ का पालन किया गया एवं जिल्ल-ए-इलाही (ईश्वर का प्रतिबिम्ब) की उपाधि धारण की।

इल्लतुमिश के बनाये गये चालीस सरदारों के गुट ‘तुर्कान-ए-चिहालगानी’ को समाप्त बलबन के द्वारा किया गया।
बलबन के द्वारा ईरान परम्पराएँ जैसे सिजदा (भूमि पर लेटकर अभिवादन) एवं पैबोस (सुल्तान के चरणों को चूमना) प्रारंभ करवाई। ईरानी त्यौहार नवरोज (इरान का नववर्ष) मनाना प्रारंभ किया।

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स्थापत्य क्षैत्र में दिल्ली में लाल महल एवं स्वयं का ‘बलबन का मकबरा’ बनवाया।
सल्तनतकालीन बलबन का मकबरा पहला ऐसा मकबरा है जो शुद्ध इस्लामी शैली वाले ‘मेहराब’ का प्रयोग किया गया है।

दीवान-ए-बरीद – सामान्तों की जमाखोरी पर नजर रखने के लिए गुप्तचर विभाग की स्थापना।
दीवान-ए-अर्ज – सैन्य विभाग की स्थापना।

कैकुबाद और शम्सुद्दीन क्यूमर्स (1287-1290 ई.) –
बलबन के द्वारा अपनी मृत्यु से पहले ही अपने बड़े पुत्र मुहम्मद के पुत्र कैखुसरव को उतराधिकारी नियुक्त कर दिया था, किन्तु तुर्की सरदारों ने उसे मुल्तान का प्रान्तीय शासक बना दिया।

दिल्ली के कोतवाल फखरूद्दीन मुहम्मद ने षड़यत्र के तहत बलबन के दुसरे पुत्र बुगराखाँ के पुत्र कैकुबाद को सुल्तान बना दिया। लेकिन कुछ समय बाद ये लकवा ग्रस्त हो गया जिसके इसके अबोध पुत्र क्यूमर्स को तुर्की सरदारों ने सिंघासन पर बैठा दिया था।
गुलाम वंश का अंतिम शासक शम्सुद्दीन क्यूमर्स था।
1290 ई. जलालुद्दीन खिलजी ने क्यूमर्स की हत्या करके एक नये वंश खिलजी वंश की स्थापना की।


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