History of India in Hindi PDF Download | Important Notes 2021 | Part-2

History of India in Hindi PDF Download | Important Notes 2021 | Part-2 (गुलाम वंश – इल्तुतमिश) for UPSC, RPSC RAS, SSC etc Exams By Jepybhakar

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गुलाम वंश या इलबारी वंश (1206-1290 ई.), इल्तुतमिश (1211-36 ई.) :-

यह शम्शी वंश का एवं इल्बरी तुर्क था। इसे 1 लाख जीतल में ऐबक ने खरीदा था।

इल्तुतमिश (1211-36 ई.)
इल्तुतमिश (1211-36 ई.)

यह दिल्ली का प्रथम मुस्लिम शासक तथा इसे ‘गुलाम का गुलाम’ भी कहा गया था।
इल्तुतमिश का कथन – भारत अरब नहीं हैं, इसे दारूल इस्लाम में परिवर्तित करना संभव नहीं है।

ऐबक के समय इल्तुतमिश ने ग्वालियर पर अधिकार किया, जिससे ऐबक ने प्रसन्न होकर ग्वालियर (मध्यप्रदेश) एवं बुलंदशहर (उत्तरप्रदेश) की इक्ता (जागीर) प्रदान की। सुल्तान बनने से पुर्व यह बदायुँ का नायब था।

वस्तुतः इल्तुतमिश दिल्ली का पहला सुल्तान था। इसने सुल्तान के पद की स्वीकृति किसी गौर के शासक से नहीं बल्कि बगदाद खलीफा बिल्लाह मंसूर से प्राप्त की।
इसने गद्दी के दावेदार ताजुद्दीन यल्दौज और नासिरूद्दीन कुबाचा को समाप्त किया।

इल्तुतमिश ने दिल्ली को राजधानी बनाया और अपने नाम के सिक्के चलाये। इस तरह से इसे दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है।
शुद्ध अरबी सिक्के चलाए। चाँदी का टंका और ताँबे का जीतल इसी के द्वारा शुरू किया गया।
प्रथम सुलतान जिसने सिक्कों पर टकसाल का नाम लिखना अनिवार्य करवाया।
प्रथम शासक जिसने अपनी पुत्री रजिया सुलताना का नाम चाँदी के टंके पर अंकित करवाया।

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इस दिल्ली का पहला सुल्तान जिसने नियमित सिक्के जारी किये एवं दिल्ली को राजधानी बनाया।
तुर्कान-ए-चिहलगानी (चालीसा दल, चालिहा दल) नामक संगठन की स्थापना कि जो चालीस वफादार गुलाम सरदारों का गुट था। इसमें बलबन भी शामिल था।
इल्तुतमिश की सेना को इश्म-ए-कल्ब या कल्ब-ए-सुल्तानी कहलाती थी।

तराइन का तृतीय
कब – 1215 ई.
इल्तुतमिश तथा याल्दौज के मध्य।
इल्तुतमिश ने गजनी के ही ख्वारिज्म की सहायता से याल्दौज को पराजित कर बदायूँ के किले में कैद कर लिया एवं कुछ समय बाद हत्या कर दी।
ख्वारिज्म शाह को इल्तुतमिश ने गजनी का सुबेदार बना दिया।
रणथम्भौर पर आक्रमण –
1226 ई. इल्तुतमिश ने मेवाड़ और उसकी राजधानी नागदा पर अधिकार करने से उद्देश्य से आक्रमण किया।
जैत्रसिंह और इल्तुतमिश के मध्य हुए भुतेला के युद्ध में इल्तुतमिश को पराजित किया।
इस युद्ध में जैत्रसिंह की राजधानी नागदा नष्ट हो गई अतः जैत्रसिंह ने अपनी नई राजधानी चितौड़ को बनाई।

मिल्हाज-उस-सिराज इसी का दरबारी कवि था।
इसके द्वारा इक्ता व्यवस्था लागु की (इस कारण इसे इक्ता प्रणाली का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है) और बंगाल को 1226 ई. बंगाल को जीतकर दिल्ली सल्तनत का इक्ता (सूबा) बनाया।
इक्ता – वेतन के बदले अधिकारीयों/सैनिकों को दी जानी वाली भुमि। भुमि प्राप्त करने वाले को इक्तेदार कहा जाता था।
1226 ई. में रणथम्भौर पर विजय प्राप्त की और परमारों की राजधानी मंदौर (मंदसौर) पर अधिकार स्थापित किया।
इल्तुतमिश को मकबरा निर्माण शैली का जन्मदाता भी कहा जाता है।

दिल्ली में स्वयं का मकबरा (यह छत विहीन मकबरा एवं एक कक्षीय) का निर्माण करवाया।

हौज-ए-खास (शम्सी ईदगाह)
हौज-ए-खास

बदायूँ में हौज-ए-खास (शम्सी ईदगाह) का निर्माण करवाया।
अतारकिन का दरवाजा नागौर (राजस्थान) में निर्माण करवाया।

1236 ई. में बामियान के विरूद्ध अभियान के दौरान बीमार होने के कारण दिल्ली लौटा एवं यहाँ पर अप्रैल 1236 ई में मृत्यु हो गई।
इल्तुतमिश को उसी के द्वारा बनवाये मकबरे सुल्तानगढ़ी में दफना दिया गया।

इसके काल में मंगोल आक्रमणकारी चंगेज खाँ (मुलनाम तेमुचिन) भारत की उत्तर-पश्चिमी सीमा पर आया था, लेकिन इसकी दुरदर्शिता के कारण तुर्कराज्य, मंगोल के आक्रमण से बचा रहा।
चंगेज अपने आप को ईश्वर का अभिशाप कहकर खुश होता था।

इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद रूकनुद्दीन फिरोजशाह अपनी माँ शाह तुर्कान के सहयोग से गद्दी पर बैठा। लेकिन शाह तुर्कान के अत्याचारों से परेशान होकर जन समूह द्वारा उसे अपदस्थ किया गया और रजिया को सुल्तान बनाया गया।


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