Indian history handwritten notes in hindi pdf download Part -3

Indian history handwritten notes in hindi pdf download Part -3  for UPSC, RPSC RAS, SSC etc Exams By Jepybhakar

Indian history handwritten notes in hindi pdf download Part -3 :- Hello students welcome to the world of knowledge. On this page, I’m going to share the Indian history notes in hindi pdf download’गुलाम वंश – रजिया सुल्तान, मुइज्जुद्दीन बहरामशाह, अलाउद्दीन मसूदशाह और नासिरूद्दीन महमूद for 2021 UPSC, RPSC RAS, SSC, Rajasthan Patwari, Police, Reet, Forest Guard etc Exams 2021-2022 candidates.

गुलाम वंश -रजिया सुल्तान, मुइज्जुद्दीन बहरामशाह, अलाउद्दीन मसूदशाह और नासिरूद्दीन महमूद  Notes PDF Download :-

रजिया (1236-40 ई.) –

दिल्ली सल्तनत के इतिहास की एकमात्र मुस्लिम महिला शासिका एवं प्रथम तुर्क महिला शासिका भी थी।

रजिया (1236-40 ई.), ndian history handwritten notes in hindi pdf download
रजिया (1236-40 ई.)

रजिया द्वारा पर्दा त्याग कर पुरूषों की भाँति कोट व कुलाह (टोपी) पहनना शुरू किया।
इसने बदायूँ एवं तबरहिन्द (भटिण्डा) का इक्तादार क्रमशः एतगीन एवं अल्तूनिया को नियुक्त किया।
अल्तूनिया द्वारा 1240 ई. में सरहिन्द विद्रोह कर दिया। अततः रजिया ने अल्तूनिया से विवाह कर लिया।
12 अक्टूबर, 1240 ई. को डाकुओं ने कैथल के निकट हत्या कर दी।
असफलता का कारण – तुर्की गुलामों की महत्त्वाकांक्षाएँ।

एलफिन्टस का कथन – रजिया अगर महिला नहीं होती तो उसका नाम भारत के महान शासकों में होता।

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मुइज्जुद्दीन बहरामशाह (1240-42 ई.) –

रजिया के तबरहिन्द प्रस्थान के करने के बाद तुर्क-सरदारों ने इल्तुतमिश के तीसरे पुत्र बहरामशाह को सिंघासन पर बैठा दिया।
1241 ई. में जब मंगोलों ने पंजाब पर आक्रमण किया तब तुर्की सरदारों द्वारा बगावत करके बहरामशाह को बन्दी बना लिया और 1242 ई. में उसकी हत्या कर डाली।
तुर्क सरदारों ने सुल्तान से शासन के अधिकार छीनकर नायब या नायब-ए-मामलिकात को सौप दिए। यह पद एतगीन को दिया गया।

अलाउद्दीन मसूदशाह (1246-65 ई.) –

यह इल्तुतमिश के पुत्र सुल्तान फिरोजशाह का पुत्र था।
इसके शासन की समस्त शक्तियाँ नायब के पास थी।
अमीर-ए-हाजिब के पद को प्राप्त करने के बाद बलबन ने अपनी शक्तियाँ बढ़ानी शुरू की।
जुन, 1246 ई. में बलबन ने इसको सिंघासन से हटा दिया।
मसूदशाह की मृत्यु कारागार में हुई।

नासिरूद्दीन महमूद (1246-65 ई.) –

16 वर्ष की अवस्था में 10 जून, 1246 को सिंघासन पर बैठा।
इसके सुल्तान बनने के समय सुल्तान और उसके तुर्की सरदारों के बीच चल रहा सघर्ष, महमूद के सुल्तान बनते ही समाप्त हो गया।
नासिरूद्दीन के शासनकाल में समस्त शक्तियां बलबन के हाथों में थी।
इसने बलबन को 1249 ई. में उलुग खाँ की उपाधि प्रदान की।
महमूद ने बलबन को नायब-ए-मामलिकात के पद को कानूनी रूप से देकर शासन के सपुर्ण अधिकार बलबन को सौंप दिये।
नासिरूद्दीन महमुद की मृत्यु के पश्चात् बलबन ने स्वयं को सुल्तान घोषित करके उसका उतराधिकारी बना।

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